Friday, September 13, 2013

एक कसक


बरगद के सूखे पत्तो की झनझनाहट,
बार बार कह रही है,
कि बरसात का मौसम जा चुका है,

एक तुम्हारी यादों का मौसम है,
बरसता रहता है अविरत,
और मैं आसरा ढूंढता रहता हूँ,
तड़पता छटपटाता हूँ,
तुम्हारी यादों से भागता हूँ,
खाली उदास सुनसान राहों पर,
तुम्हारा नाम जुबान पर आते आते,
चुभता है फ़ांस की तरह,

तुम्हारे जाने के बाद,
एक कसक सी है दिल में,
शायद तुम्हारी कमी सी है,

तुम लौट कर आओ अगर,
मैं फिर मिलूँगा तुम्हें,
जेब में भरे कुछ ख्वाब लेकर,
उसी बरगद के पेड़ के नीचे,
सावन के आने से पहले।

Tuesday, September 3, 2013

आह प्याज़ !!

आह प्याज़ !!

दरअसल आज हुआ यह कि सुबह सुबह मम्मी ने बाज़ार से प्याज़ लाने को कहा। हम निकल लिए थैला लेकर,  मुश्किल से एक दुकान मिली प्याज़ की, लाल लाल प्याज़ देखकर बड़े आनंद की अनुभूति हुई। प्याज़ की दुकान पर चार हवलदार पहरा दे रहे थे, अब कल ही की बात है तीन हथियारबंद बदमाशों ने एक बोरी प्याज़ और 20 किलो टमाटर सरेआम लूट लिए। इसीलिए पुलिस ने जनहित में सूचना जारी की  है कि पारदर्शी थैले मैं प्याज़ न ले जाएँ। खेर मैं खड़ा हुआ था और लोग घूर रहे थे, उनके चेहरे पर इर्ष्या के भाव साफ़ झलक रहे थे।अब कहाँ आम आदमी में इतनी हिम्मत है कि कांग्रेस राज में थैलाभर प्याज़ खरीद  सके? मैं भीड़ में लोगों के चेहरे पढ़ रहा था कि इतने में दुकानदार खीज कर बोल कि "खां ,आज प्याज का भाव 60 रूपए किलो और देखने भर का 20 रूपए किलो जल्दी बताओ किस हिसाब से बाँट चढ़ाऊँ।" मैं घबराया, थोड़ा सकपकाया कि मीटर चालू है भिया, पाव भर प्याज़ लेने आए  हैं और खांमखां किलो भर का बिल कटवाना न पड़ जाए। प्याज़ के ऐसे तेवर देखकर इस बात का एहसास भी हो गया कि आजकल भले ही 'सच्चे प्यार' की कीमत न हो, 'अच्छे प्याज़' की बड़ी कीमत है। घबराहट में एक पाव प्याज़  खरीद ली। कुछ कदम चला ही था कि दो Onion Snatcher थैला लेकर भाग गए। थाने में रपट लिखवाई तो दरोगा जी ने और दो चार बातें सुना दी

बस सुबह से सदमे में हूँ, क्या करें आम आदमी हैं कभी पेट्रोल कभी टमाटर और कभी प्याज़ रुला देती है। बस इसीलिए आज बैंक में लाकर का आवेदन देकर आया हूँ, प्याज़ घर में रखना खतरे से खाली नहीं रहा।