Sunday, June 23, 2013

एक पुलिंदा

तेरी यादों का एक पुलिंदा,
मैंने रख दिया है अपने घर के एक कोने में,
एक कोना,
जहाँ है नितांत अँधेरा,
थोड़ी ठंडक,
थोड़ी नमी,

उस पुलिंदे में बांध रखी हैं,
तुम्हारे कदमों की आहट,
तुम्हारी मुस्कराहट,
तुम्हारी कुछ बातें,
वो प्यारी मुलाकातें,
वह स्नेहिल स्पर्श,
कुछ तोहफ़े,
कुछ शिकायतें,
कुछ शरारतें,

और इन सबसे महत्वपूर्ण,
तुम्हारा प्यार,

सब कुछ समेट कर रख दिया है,
इस बंद कमरे में,
ठिठुरते मन के साथ,
क्यूंकि तुम्हारा प्यार,
तुम्हारी याद,
मेरी कविताओं के शब्दमात्र हैं,
बस कुछ बातें हैं।

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