तुम पास नहीं,
किन्तु बटोर ली हैं मैंने,
तुम्हारी यादें,
तुम्हारा एहसास,
तुम्हारा स्पर्श,
हर वह जगह,
जहाँ बिखेर रखी है तुमने,
अपनी सुगंध,
हर वह स्वप्न,
जहाँ सम्पन्न था मेरा जीवन,
तुम्हारे साथ,
हर वह बात,
जो ज़बान पर आते आते,
रुक गयी थी,
और हृदय में सजा लिया है,
एक मंदिर,
ताकि सुरक्षित रख सकूँ,
हर बात,
उस पल तक,
जब तुम लौटकर आओगी,
शायद,,,,
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