अपने कुछ भाव,
जीवन की आपा धापी में,
ऐसे दोतरफा भावों को,
उन अनकही बातों को,
उन अधजगी रातों को,
आज छोड़ रहा हूँ,
अधूरे पन्नो को,
बिखरे शब्दों को,
निढाल रागों को,
आज छोड़ रहा हूँ,
उन अपरिणत संवेदनाओं को,
बिखरी अपेक्षाओं को,
निरर्थक मनोभावों को,
आज छोड़ रहा हूँ,
क्षोभित भावों को,
असंगत विचारों को,
बेतुकी बातों को,
आज छोड़ रहा हूँ,,,,,,,
आज छोड़ रहा हूँ,
कुछ नाते,
आज तोड़ रहा हूँ,
जीवन की आपा धापी में,
और रिश्तों की आवा जाही में,
अर्थ ही बदल चुका है,
कुछ शब्दों का,
ऐसे दोतरफा भावों को,
उन अनकही बातों को,
उन अधजगी रातों को,
आज छोड़ रहा हूँ,
अधूरे पन्नो को,
बिखरे शब्दों को,
निढाल रागों को,
आज छोड़ रहा हूँ,
उन अपरिणत संवेदनाओं को,
बिखरी अपेक्षाओं को,
निरर्थक मनोभावों को,
आज छोड़ रहा हूँ,
क्षोभित भावों को,
असंगत विचारों को,
बेतुकी बातों को,
आज छोड़ रहा हूँ,,,,,,,
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