Tuesday, February 12, 2013

झरोखे से आती हुई भोर की पहली पहली किरणे,
अलसाई हुई आँखों से,
निद्रा वलय को बिखेरती,
.
.
बाहर झांक कर देखा,
तो आज मौसम का मिज़ाज ही नया सा है,
-
-
लौटता हुआ जाड़ा,
लिहाफ़ का आलिंगन,
और हाथ में चाय का मग,
इन कुछ चीजों का मिलन ही अद्भुद है,...

No comments:

Post a Comment