Sunday, October 26, 2014

अधूरे ब्लोग्स

ड्राफ्ट में पड़े हुए अधूरे ब्लोग्स की तरह हमारी कहानी भी अधूरी ही है।
तुम होती तो शायद कुछ अफसाने पूरे लिख दिए होते,
या शायद तुम होती तो ये बातें बाते भी ना होती,
या फिर तुम नहीं हो तभी तो ये बातें हैं,
अधूरी सी,
हमारी कहानी की तरह।

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तुम्हें याद है?
आज से दस साल पहले,
केमिस्ट्री की क्लास में,
जब हम डेल्टन की एटॉमिक थ्योरी में उलझे हुए थे,
मैं फ्री रेडिकल  तरह,
तुम्हारे इर्द गिर्द
भटका करता था,

तुम्हे याद है?
असाइनमेंट के बहाने से,
जो कुछ लम्हे चुरा लिया करते थे,
वो लम्हे,
Boomerang की तरह,
बार बार लौट आते हैं।

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तुम्हारे जाने के बाद,
अब नींद कहाँ,
सोने का अभिनय मात्र,
गढ़ता हूँ सपनों के स्वांग,
मेरे शब्द उजाले से दूर,
कविता अँधेरे में रच रहा हूँ,
यादों से लड़ता भिड़ता,
कुछ बातें लिख रहा हूँ।

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