Saturday, February 23, 2013

अपने कुछ भाव आज छोड़ रहा हूँ

अपने कुछ भाव,
आज छोड़ रहा हूँ,

कुछ नाते,
आज तोड़ रहा हूँ,

जीवन की आपा धापी में,
और रिश्तों की आवा जाही में,
अर्थ ही बदल चुका है,
कुछ शब्दों का,

ऐसे दोतरफा भावों को,
उन अनकही बातों को,
उन अधजगी रातों को,
आज छोड़ रहा हूँ,

अधूरे पन्नो को,
बिखरे शब्दों को,
निढाल रागों को,
आज छोड़ रहा हूँ,

उन अपरिणत संवेदनाओं को,
बिखरी अपेक्षाओं को,
निरर्थक मनोभावों को,
आज छोड़ रहा हूँ,

क्षोभित भावों को,
असंगत विचारों को,
बेतुकी बातों को,
आज छोड़ रहा हूँ,,,,,,,


Friday, February 22, 2013

तुम पास नहीं

तुम पास नहीं,
किन्तु बटोर ली हैं मैंने,
तुम्हारी यादें,
तुम्हारा एहसास,
तुम्हारा स्पर्श,

हर वह जगह,
जहाँ बिखेर रखी है तुमने,
अपनी सुगंध,

हर वह स्वप्न,
जहाँ सम्पन्न था मेरा जीवन,
तुम्हारे साथ,

हर वह बात,
जो ज़बान पर आते आते,
रुक गयी थी,

और हृदय में सजा लिया है,
एक मंदिर,
ताकि सुरक्षित रख सकूँ,
हर बात,
उस पल तक,
जब तुम लौटकर आओगी,
शायद,,,,


Tuesday, February 12, 2013

झरोखे से आती हुई भोर की पहली पहली किरणे,
अलसाई हुई आँखों से,
निद्रा वलय को बिखेरती,
.
.
बाहर झांक कर देखा,
तो आज मौसम का मिज़ाज ही नया सा है,
-
-
लौटता हुआ जाड़ा,
लिहाफ़ का आलिंगन,
और हाथ में चाय का मग,
इन कुछ चीजों का मिलन ही अद्भुद है,...

Monday, February 11, 2013

कुछ बातें बेवजह की



कुछ वीरानी सी है यह शाम,
आज शब्दों की कुछ कमी सी है,
रोज की तरह आज भी सूरज डूबते हुए लालिम ही था,
बदला कुछ भी नहीं,
पर कुछ भावनाएँ बदल चुकी हैं,
मेरी नहीं,,
तुम जानती हो किसकी,,
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वैसे तो तुम कभी थी भी नहीं मेरी,
किन्तु एक भाव था तुम्हें अपना माना था कभी,
लरज़िश भरे हाथों से कुछ बातों का पुलिंदा सौंपा था कभी,
आज उन बातों का कुछ अर्थ नहीं,
कुछ बातें बेवजह की थी,
आज उनका कुछ अर्थ नहीं,
तुम्हारे लिए,,,
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हसरतों के रास्ते भी बड़े एकाकी होते हैं,
कोई राज़ी नहीं होता साथ देने को,
साथ रह जाती हैं बस कुछ यादें,
वह भी बिछड़ जाएँगी,
कुछ रास्तों से कटती पगडंडियों की तरह,,,,
कुछ तुम्हारी तरह,
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कुछ भी तो नहीं है इस मकान में,
दरीचे और दरवाजों के सिवाय,

मेज पर बिखरी पड़ी किताबें,
अलमारी में बेतरतीब पड़े कपड़े,
दीवार पर बीते साल का कैलेंडर

तुम होती तो शायद सजाया होता करीने से,,,
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एक दिन मुरझाएगा,
मेरे बगीचे में लगा वो गुलाब का फूल,
उस पर मंडराता भंवरा भी,
रंजीदा हो चला जाएगा,
बस उस दिन के पहले,
तुम एक बार फिर मिलना,
.
एक आखिरी तोहफा,
तुम्हारे नाम से लिखे कुछ पन्ने,
'कुछ बातें अनकही,'
अब मेरे किसी काम की नहीं।
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